WhatsApp Username Feature पर कंपनी की सफाई, फ्रॉड बढ़ने के दावों पर दिए 7 बड़े जवाब

नई दिल्ली

 व्हाट्सऐप के नए यूजरनेम फीचर को लेकर केंद्र सरकार की ओर से उठाई गई चिंताओं के बीच Meta ने अपना पक्ष स्पष्ट किया है. कंपनी का कहना है कि सरकार जिन आशंकाओं को लेकर सवाल उठा रही है, उन्हें ध्यान में रखते हुए पहले से ही कई स्तर की सुरक्षा व्यवस्था तैयार की गई है. Meta का दावा है कि Username फीचर में ऐसे कई सुरक्षा उपाय शामिल किए गए हैं, जिनकी मदद से फर्जीवाड़ा, पहचान की नकल और ऑनलाइन धोखाधड़ी को प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा। 

हाई प्रोफाइल नामों को पहले से सुरक्षित रखा गया
एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाट्सऐप के प्रवक्ता ने बताया कि सार्वजनिक हस्तियों, सरकारी संस्थानों और मशहूर लोगों के नाम फिलहाल सुरक्षित रखे गए हैं, ताकि उन्हें केवल उनके वास्तविक मालिक ही इस्तेमाल कर सकें. इतना ही नहीं, इन नामों से मिलते जुलते यूजरनेम भी रिजर्व रखे गए हैं, जिससे कोई फर्जी अकाउंट बनाकर लोगों को भ्रमित न कर सके। 

फोन नंबर छिपाकर भी कर सकेंगे चैट
व्हाट्सऐप की मूल कंपनी मेटा ने बताया कि नया यूजरनेम फीचर इस तरह तैयार किया गया है कि यूजर्स बिना अपना मोबाइल नंबर साझा किए एक दूसरे से जुड़ सकेंगे. इसका उद्देश्य यूजर्स की निजता को और मजबूत बनाना है. हालांकि कंपनी ने साफ किया कि व्हाट्सऐप इस्तेमाल करने के लिए मोबाइल नंबर पहले की तरह जरूरी रहेगा. यूजरनेम केवल बातचीत शुरू करने का एक नया विकल्प होगा. कंपनी ने बताया कि यूजरनेम फीचर एक साथ सभी यूजर्स के लिए जारी नहीं किया जाएगा. इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा. फिलहाल कुछ यूजर्स से केवल अपना पसंदीदा यूजरनेम चुनने के लिए कहा गया है। 

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व्हाट्सऐप के अनुसार, सिस्टम में ऐसे कई सुरक्षा तंत्र लगाए गए हैं जो किसी भी तरह की फर्जी पहचान, धोखाधड़ी और गलत इस्तेमाल के पैटर्न की पहचान करेंगे और जरूरत पड़ने पर उन्हें तुरंत ब्लॉक कर देंगे. कंपनी ने बताया कि किसी नए अकाउंट को सीमित संख्या में ही नए लोगों से संपर्क करने की अनुमति होगी. इसके अलावा किसी का यूजरनेम अनुमान लगाकर खोजने या लगातार ट्राई करने की कोशिशों को भी सिस्टम रोक देगा। 

यूजरनेम से मैसेज आने पर पूरी जानकारी मिलेगी
व्हाट्सऐप ने बताया कि किसी यूजर को यूजरनेम के जरिए मैसेज भेजने के लिए उसका सही यूजरनेम पता होना जरूरी होगा. जब किसी को यूजरनेम के जरिए मैसेज मिलेगा, तो उसके साथ यह जानकारी भी दिखाई जाएगी कि मैसेज भेजने वाला नया अकाउंट है या पहले से संपर्क में है, क्या दोनों के कोई साझा ग्रुप हैं और उसका देश कौन सा है. इससे यूजर को यह समझने में आसानी होगी कि सामने वाला भरोसेमंद है या नहीं। 

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केंद्र सरकार ने तीन दिन में मांगा जवाब
इससे पहले केंद्र सरकार ने व्हाट्सऐप को नोटिस जारी कर यूजरनेम फीचर पर तीन दिनों के भीतर विस्तृत जवाब देने को कहा है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि जब तक इस मामले में पूरी तरह विचार विमर्श नहीं हो जाता, तब तक इस फीचर को भारत में लागू नहीं किया जा सकता। 

सरकार को फर्जीवाड़े और साइबर ठगी की आशंका
सूत्रों के मुताबिक, सरकार यह जांच कर रही है कि कहीं इस फीचर का इस्तेमाल सरकारी विभागों, बैंकों और अन्य भरोसेमंद संस्थानों की फर्जी पहचान बनाकर लोगों को ठगने के लिए तो नहीं किया जा सकता. इसके अलावा इस फीचर की समीक्षा यूजर सुरक्षा, जवाबदेही और भारत के डिजिटल नियमों के अनुरूप भी की जा रही है। 

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मेटा से मांगी गई सुरक्षा व्यवस्था की पूरी जानकारी
सरकार ने मेटा से यह भी पूछा है कि इस फीचर में कौन कौन से सुरक्षा उपाय लगाए गए हैं और कंपनी फर्जी पहचान तथा दुरुपयोग को रोकने के लिए क्या व्यवस्था कर रही है. सरकार ने अपने नोटिस में कहा है कि यह फीचर ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग, डिजिटल अरेस्ट जैसे साइबर अपराधों और पहचान की नकल करने वाले हमलों की घटनाओं को बढ़ा सकता है. सरकार का मानना है कि यदि कोई व्यक्ति किसी सरकारी संस्था, बैंक, सार्वजनिक प्राधिकरण या किसी प्रसिद्ध व्यक्ति से मिलता जुलता यूजरनेम बना लेता है, तो इससे लोगों के साथ धोखाधड़ी की आशंका बढ़ सकती है। 

सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार मेटा के जवाब का अध्ययन करने और सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं पर आगे विचार विमर्श करने के बाद ही यह तय करेगी कि भारत में व्हाट्सऐप के यूजरनेम फीचर को अनुमति दी जाए या नहीं। 

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